यूपी में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा एक बार फिर सपा को पटखनी देती नजर आ रही है

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यूपी में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा एक बार फिर सपा को पटखनी देती नजर आ रही है

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की रिक्त हुई इस सीटों के लिए बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशी तय कर लिये हैं। भाजपा ने राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, प्रदेश महामंत्री अमरपाल मौर्य और यूपीए सरकार में मंत्री रहे व कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए आरपीएन सिंह, भाजपा के आगरा के पूर्व महापौर नवीन जैन, गाजीपुर सदर की पूर्व विधायक संगीता बलवंत बिंद, मुगलसराय से पूर्व विधायक साधना सिंह और मथुरा के पूर्व सांसद तेजवीर सिंह को भी प्रत्याशी बनाया है। यूपी विधानसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या देखते हुए भाजपा के सभी प्रत्याशियों का राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होना तय है। बात जातीय गणित की कि जाये तो बीजेपी ने जातीय समीकरण साधने के लिए एक ब्राह्मण, एक वैश्य, एक ठाकुर और चार पिछड़ों (कुर्मी, मौर्य, जाट व बिंद) को प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी प्रत्याशी 14 फरवरी वसंत पंचमी के दिन नामांकन कर सकते हैं।

बात समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों की कि जाये तो सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी अपनी तेजतर्रार राज्यसभा सदस्य रहीं जया बच्चन को फिर से राज्यसभा में भेज सकती है। इसके अलावा सपा के राष्ट्रीय महासचिव व पांच बार के सांसद रहे सलीम शेरवानी व मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह यादव को भी प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा तेज है। वैसे सपा के दो उम्मीदवारों के ही आसानी से जीत की संभावनाएं बताई जा रही हैं। 15 फरवरी को नामांकन का अंतिम दिन है।

गौरतलब है कि राज्यसभा की खाली हो रही 10 सीटों में 9 भाजपा और एक सपा के पास हैं। जो ताजा समीकरण बन रहा है उससे बीजेपी का 07 सीटों पर जीतना तय माना जा रहा है। वहीं दो सीटों पर सपा की जीत निश्चित मानी जा रही है। एक सीट का पेंच फंसा है। बीजेपी इसे भी अपनी जेब में डालना चाहती है। राष्ट्रीय लोकदल के बीजेपी के साथ आने के बाद बीजेपी के लिये आठवीं सीट पर जीत की लड़ाई काफी आसान हो गई है। पिछले दो दिनों से रालोद के बीजेपी के साथ जाने को लेकर चर्चाएं तेज थीं। चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न मिलने के बाद तो अब रालोद मुखिया जयंत चौधरी भी कहने लगे हैं कि चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिये जाने के बाद अब बीजेपी को कैसे मना किया जा सकता है। पीएम ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। खास बात यह है कि कल तक जयंत चौधरी या रालोद की ओर से इस चर्चा का कोई समर्थन या खंडन नहीं किया गया था, लेकिन अब जयंत की भाषा बिल्कुल बदल गई है। जयंत के पाला बदलने से यूपी में 10 सीटों पर हो रहे राज्यसभा चुनाव का भी गणित बदलता दिख रहा है। राज्य सभा चुनाव के लिए विधानसभा के सदस्य वोटर होते हैं। इस समय विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 399 है। राज्यसभा में निर्वाचित होने के लिए न्यूनतम वोट का जो फॉर्मूला है उसके हिसाब से इस बार एक सीट जीतने के लिए 37 विधायक की जरूरत होगी। इस हिसाब से मौजूदा स्थिति में भाजपा गठबंधन 7 और सपा गठबंधन 3 सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है, लेकिन यह तभी संभव था, जब रालोद का सपा के साथ गठबंधन बरकरार रहता।

    

वोटों के गणित की बात की जाये तो एनडीए के पास इस समय सहयोगियों को मिला कर 277 वोट हैं। ऐसे में 37 का कोटा सबको आवंटित करने के बाद उसके पास 18 वोट अतिरिक्त बचेंगे। जनसत्ता दल उच्च सदन के चुनाव में अब तक भाजपा के ही साथ रहा है। इसलिए इनके 2 वोट भी सत्ता पक्ष के साथ जाने तय हैं। ऐसे में भाजपा के पास 20 अतिरिक्त वोट होंगे। वहीं, विपक्षी गठबंधन के पास मौजूदा संख्या 119 विधायकों की है। कोटा आवंटित करने के बाद भी इस समय उनके पास 6 अतिरिक्त विधायक बचेंगे। अगर रालोद एनडीए के पाले में जाता है तो सपा गठबंधन के पास विधायकों की संख्या घटकर 110 हो जाएगी। सपा को अपना तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए 1 और विधायक की जरूरत होगी, जिसे तलाशना आसान नहीं तो मुश्किल भी नहीं होगा। रालोद को मिलाकर भाजपा के पास 29 अतिरिक्त वोट हो जाएंगे। अब अगर भाजपा अपना आठवां उम्मीदवार उतारती है तो फैसला दूसरी वरीयता के वोटों से होगा, जिसमें सत्तारुढ़ गठबंधन के लिए संभावनाएं बढ़ जाएंगी। फिलहाल, भाजपा की ओर से 10 पर्चे खरीदे गए हैं।

-अजय कुमार

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