भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे विपक्षी दलों के नेताओं की पूरी साख ही दांव पर है

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भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे विपक्षी दलों के नेताओं की पूरी साख ही दांव पर है

गत वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में तीन राज्यों में जीत हासिल करने के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि केंद्र की भाजपा सरकार भ्रष्टाचार को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं को बख्शेगी नहीं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जमीन घोटाले में हुई गिरफ्तारी से यह बात साबित हो गई। आश्चर्य यह है कि विपक्षी दल सोरेन की गिरफ्तारी पर भाजपा पर राजनीतिक विद्वेषता से कार्रवाई करने का आरोप तो लगा रहे हैं किन्तु यह एक बार भी नहीं बताया कि देश से भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए उनके पास क्या रोड मैप है। जिन राज्यों में विपक्षी दलों का शासन है, उनमें भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके विपरीत केंद्र की भाजपा सरकार को समझ में आ गया है कि देश के मतदाता भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी मुहिम के समर्थन में हैं।

कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेरने की काफी कोशिश की, किन्तु कामयाबी नहीं मिल सकी। फ्रांस से खरीदे युद्धक विमान राफेल, अडानी और अंबानी को लेकर विपक्षी ने केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए। इन आरोपों को लेकर विपक्षी दलों सुप्रीम कोर्ट में याचिका तक दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें सारहीन मान कर खारिज कर दिया। इससे भाजपा का नैतिक बल बढ़ गया। भाजपा ने भ्रष्टाचार की मुहिम को तेज करने के साथ ही सोरेने जैसे नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की। विपक्ष भ्रष्टाचार पर बदले की नीयत का आरोप लगा रहा है किन्तु प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा नेताओं की गिरफ्तारी के ज्यादातर मामलों में अदालतों से जमानत तक नहीं मिल सकी। इससे जाहिर होता है कि ईडी और सीबीआई ने ठोस सबूतों के आधार पर कार्रवाई की है। तृणमूल कांग्रेस और आप सहित कई पार्टियों के नेता जमानत नहीं मिलने के कारण महीनों-सालों से जेल में बंद हैं।

अदालतों ने यह माना है कि इन नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार में लिप्त होने के पर्याप्त सबूत मिले हैं। यही वजह है इनको जमानत नहीं मिल सकी, ताकि सबूतों और गवाहों को प्रभावित नहीं किया जा सके। गौरतलब है कि कांग्रेस सहित 14 दलों ने ईडी और सीबीआई पर दुर्भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में जांच एजेंसियों को लेकर भविष्य के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई थी। विपक्षी दलों का तर्क था कि 2013-14 से 2021-22 तक सीबीआई और ईडी के मामलों में 600 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ईडी की ओर से 121 राजनीतिक नेताओं की जांच की गई है, जिनमें से 95 प्रतिशत विपक्षी दलों से हैं। सीबीआई की ओर से 124 जांचों में से 95 प्रतिशत से अधिक विपक्षी दलों से हैं। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि विशेष मामले के तथ्यों के बिना सामान्य दिशानिर्देश निर्धारित करना संभव नहीं है। सीजेआई ने कहा कि जब आपके पास व्यक्तिगत आपराधिक मामला हो तो हमारे पास वापस आएं। मामले के तथ्यों से संबंध रखे बिना सामान्य दिशा निर्देश देना खतरनाक होगा। इस पर विपक्षी दलों ने याचिका वापस ले ली।

ज्यादातर विपक्षी दलों के नेताओं को जमानत नहीं मिलने और सुप्रीम कोर्ट से विपक्षी दलों को मिली हार के बाद भाजपा के हौसले बुलंद हो गए। यही वजह है कि विगत विधानसभा चुनाव और उसके बाद सार्वजनिक तौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र, गृहमंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ हुंकार भरते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री सोरेन की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों के कई बड़े नेताओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद खतरे की घंटी सबसे तेज तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आस पास ही बज रही है। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले का सामना कर रहे हैं। इस मामले में ईडी ने केजरीवाल को चार समन भेजे हैं लेकिन वो अभी तक केंद्रीय जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं।

केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर करीब एक दर्जन से अधिक विपक्षी नेता हैं। देर-सवेर इनका भी बच पाना मुश्किल है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता रेवंत रेड्डी पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। आरोप है कि रेवंत जब टीडीपी में थे, तो उन्होंने साल 2015 में विधान परिषद के चुनाव के दौरान अपने पक्ष में वोट देने के लिए एक विधायक को कथित तौर पर पचास लाख रुपये रिश्वत के तौर पर दिये थे। आंध्र प्रदेश के चीफ मिनिस्टर और वाईएसआर कांग्रेस के मुखिया जगन मोहन रेड्डी पर भी प्रवर्तन निदेशालय की नजर है। उन पर यूपीए शासन के दौरान ही कई मामले दर्ज हो गए थे। ईडी ने जगन मोहन के खिलाफ 2015 में मनी लॉन्ड्रिंग का नया मामला दर्ज किया था। यह मामला जगन के स्वामित्व वाली भारती सीमेंट्स के पैसों के लेने-देने के आरोप से जुड़ा है। मौजूदा समय में वामदल की सरकार सिर्फ केरल में बची है और वहां भी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है। मामला विजयन के बिजली मंत्री रहने के दौरान का है। सीबीआई ने 1995 एसएनसी लवलीन केस में चार्जशीट दायर की थी। यह मामला इडुक्की में जलविद्युत परियोजनाओं के आधुनिकीकरण के लिए कनाडाई फर्म एसएनसी लवलिन को दिए गए अनुबंध में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। कांग्रेस नेता और कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार पर कई सालों से सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग की नजर है। साल 2013 से 2018 के बीच 74 करोड़ रुपये की आय को लेकर सीबीआई ने 2020 में कांग्रेस नेता पर केस दर्ज किया।

केंद्रीय जांच एजेंसियों की रडार पर लालू यादव का परिवार लंबे समय से है। बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव, पूर्व सीएम राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, मीसा भारती कथित नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में मुख्य आरोपी हैं। इसके अलावा भी लालू यादव पर कई कथित भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं। कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा पर भी ईडी की नजर है। हुड्डा की मानेसर जमीन सौदा मामले और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की पंचकुला में भूमि आवंटन मामले की जांच चल रही है। इसी तरह राजस्थान के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और सांसद कार्ति चिदंबरम का नाम कथित “एम्बुलेंस घोटाला” मामले में है। कांग्रेस नेताओं पर 2015 में मामला दर्ज किया गया था, जो 2010 में फर्जी तरीके से जिकित्सा हेल्थकेयर को “08 एम्बुलेंस सर्विस” चलाने का ठेका देने से संबंधित है। कंपनी में पायलट और चिदंबरम कथित तौर पर डायरेक्टर थे। कंपनी पर अत्यधिक बढ़ा चढ़ाकर चालान जमा करने का आरोप है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल अपनी सरकार के दौरान कोयला परिवहन, शराब की दुकानों के संचालन और महादेव गेमिंग ऐप में अनियमितताओं से संबंधित कथित मनी लॉन्ड्रिंग के कम से कम तीन मामलों में ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी ईडी और सीबीआई की निगाह है। वो गोमती रिवरफ्रंट परियोजना के अलावा खनन ठेंका में कथित अनियमितताओं के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के दायरे में हैं। यूपी की पूर्व सीएम और बीएसपी चीफ मायावती के कार्यकाल के दौरान की कई परियोजनाओं की जांच चल रही है। हालांकि, उनका नाम एजेंसियों की किसी भी एफआईआर में नहीं है। इसके अलावा भी विपक्षी दलों के ऐसे नेताओं की सूची में कई नाम हैं, जिनके खिलाफ ईडी और सीबीआई में मामले दर्ज हैं। जिस तरह विपक्षी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर कार्रवाई चल रही है, उससे देश के लोगों में इनकी छवि लगातार धूमिल होती जा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की न्याय यात्रा जैसी मुहिम भी कांग्रेस और विपक्षी दलों के लिए संजीवनी तब तक साबित नहीं होगी जब तक विपक्षी दल भ्रष्टाचार के खिलाफ पारदर्शी और समरूपता की नीति देश के सामने पेश नहीं करता।

– योगेन्द्र योगी

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