चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न की घोषणा पर उनके पैतृक गांव नूरपुर में जश्न

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चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न की घोषणा पर उनके पैतृक गांव नूरपुर में जश्न

हापुड़। केंद्र सरकार की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा करने के बाद उनकी जन्मस्थली नूरपुर की मढ़ैया में जश्न का माहौल है। पूर्व प्रधानमंत्री को भारत रत्न दिये जाने की सूचना मिलते ही ग्रामीण झूम उठे और पूरे गांव में ढोल नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटी और गांव में जश्न मनाया जा रहा है। उनके परिवार के सदस्यों ने इसके लिये प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। उधर गांव की महिलाओं ने भी गीत गाते हुए नृत्य किया और मिठाईयां बांटी, पूरे गांव में दीपावली जैसा माहौल है‌। 

चौधरी चरण सिंह का जन्म हापुड़ के बाबूगढ़ छावनी स्थित नूरपुर की मढ़ैया में 23 दिसम्बर 1902 को हुआ था। हापुड़ विधानसभा क्षेत्र के गांव नूरपुर में भारत रत्न की घोषणा के बाद से गांव में राजनीतिक लोगों का आना शुरू हो गया और ग्रामीणों ने जमकर खुशियां मनाई। जयंत चौधरी के चचेरे भाई व भारतीय जनता पार्टी के विधायक हरेन्द्र चौधरी एवं उनकी ब्लाक प्रमुख पत्नी ममता चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए खुशियां मनाई। गांव में पूर्व उप प्रमुख सुमेर सिंह ने बताया, प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा से गांव में उत्साह का माहौल है। सब राजनीतिक दल केवल फर्जी बातें करते थे, परन्तु मोदी जी ने ही चौधरी साहब को भारत रत्न देने की घोषणा से सबका दिल जीत लिया है। 

गांव प्रधान पद्म सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को भारत रत्न की घोषणा से भाजपा ने सिद्ध कर दिया कि केवल भाजपा ही जाटों की असली हितैषी है, गांव में सभी लोग भाजपा का आभार व्यक्त कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और चौधरी चरण सिंह के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित किये जाने की घोषणा की। 

प्रधानमंत्री मोदी ने एक पोस्ट में कहा, हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। चौधरी चरण सिंह तीन अप्रैल 1967 से 25 फरवरी 1968 और 18 फरवरी, 1970 से एक अक्टूबर, 1970 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे थे।

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